
दुबई/रियाद. अमेरिका और ईरान के बीच 14 दिनों के युद्धविराम (Ceasefire) की घोषणा के बाद भी खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल छंटे नहीं हैं. सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और कुवैत जैसे देशों में अचानक अलर्ट सायरन बजने से हड़कंप मच गया है. सुरक्षा एजेंसियों ने मिसाइल और ड्रोन हमलों की आशंका के चलते नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है.
होर्मुज जलडमरूमध्य: तनाव का असली केंद्र
खाड़ी देशों में इस हाई अलर्ट की सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) है. दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी संकरे रास्ते से गुजरता है. इजरायली मीडिया के अनुसार, ईरान इस जलमार्ग को 'सौदेबाजी' के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है. जब तक यह रास्ता पूरी तरह सुरक्षित और अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए नहीं खुलता, तब तक छिटपुट हमलों और तनाव के बने रहने की पूरी आशंका है.
एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय, लोग सहमे
कुवैत और बहरीन: कुवैती सेना ने पुष्टि की है कि उनका एयर डिफेंस सिस्टम संभावित ड्रोन घुसपैठ को रोकने के लिए सक्रिय है. बहरीन में भी सायरन बजने के बाद लोगों को बंकरों और सुरक्षित जगहों पर भेजा गया.
UAE और कतर: यूएई ने अपने रक्षा कवच को 'हाई अलर्ट' पर रखा है, जबकि कतर ने हालात को 'अत्यधिक खतरनाक' श्रेणी में रखा है.
इजरायल का दावा: इजरायली सेना ने आरोप लगाया है कि सीजफायर के ऐलान के बावजूद ईरान की ओर से मिसाइलें दागी गई हैं, हालांकि ईरान ने इन्हें उकसावे वाली कार्रवाई का जवाब बताया है.
इस्लामाबाद वार्ता पर टिकी नजरें
भले ही जमीन पर मिसाइलों का खतरा मंडरा रहा हो, लेकिन राजनयिक स्तर पर 10 अप्रैल को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाली बैठक को आखिरी उम्मीद माना जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका पर युद्ध के बढ़ते आर्थिक बोझ ने उसे झुकने पर मजबूर किया है, लेकिन इजरायल और ईरान के बीच की आपसी रंजिश इस 2 हफ्ते के सीजफायर को कभी भी तोड़ सकती है.
विशेषज्ञों की राय
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह सीजफायर बहुत 'नाजुक' है. इजरायल अपने रणनीतिक लक्ष्यों (जैसे लेबनान में हिजबुल्लाह को कमजोर करना) को पूरा किए बिना पूरी तरह शांत नहीं होगा. वहीं, ईरान अपनी शर्तों (प्रतिबंध हटाना और संपत्ति की वापसी) पर अड़ा हुआ है.
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