
तेहरान/वाशिंगटन. अमेरिका और ईरान के बीच 14 दिनों के युद्धविराम (Ceasefire) की घोषणा के चंद घंटों बाद ही ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कड़े तेवर दिखाए हैं. मोजतबा ने ईरानी सेना को फायरिंग रोकने का आदेश तो दिया है, लेकिन साथ ही आगाह किया है कि इसे युद्ध की समाप्ति न समझा जाए.
"दुश्मन ने गलती की तो होगा जोरदार पलटवार"
ईरानी सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित संदेश में मोजतबा खामेनेई ने कहा कि सभी सैन्य इकाइयां आदेश का पालन करें, लेकिन पूरी तरह सतर्क रहें. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "यह युद्ध का अंत नहीं है. हमारे सैनिकों के हाथ अभी भी ट्रिगर पर हैं. यदि अमेरिका या इजरायल ने सीजफायर के दौरान कोई भी उकसावे वाली कार्रवाई की, तो उसका जवाब पूरी ताकत के साथ दिया जाएगा."
खामेनेई की मौत और 40 दिनों का प्रतिशोध
यह संघर्ष 28 फरवरी को तब शुरू हुआ था जब अमेरिका और इजरायल ने एक बड़े हमले में ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को निशाना बनाया था. ईरान का दावा है कि 39-40 दिनों की इस जंग में उसने अपने दुश्मन को काफी नुकसान पहुँचाया है और अपने अधिकांश सैन्य लक्ष्य हासिल कर लिए हैं.
इस्लामाबाद वार्ता: ईरान की 10 सख्त शर्तें
पाकिस्तान की मध्यस्थता में 10 अप्रैल से इस्लामाबाद में होने वाली औपचारिक बातचीत के लिए ईरान ने अपना 10-पॉइंट प्लान पेश किया है. ईरान की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
सम्पत्ति की वापसी: विदेशों में जमी हुई ईरानी संपत्तियों को तुरंत वापस किया जाए.
प्रतिबंधों का खात्मा: ईरान पर लगे सभी आर्थिक और सैन्य प्रतिबंध हटाए जाएं.
सैन्य वापसी: खाड़ी क्षेत्र से अमेरिकी सेना की पूरी तरह से वापसी.
मुआवजा: युद्ध में हुए भारी नुकसान की आर्थिक भरपाई.
UNSC की मुहर: इन शर्तों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के रूप में कानूनी मान्यता मिले.
ट्रंप का रुख: "होर्मुज स्ट्रेट खुला, तो ही शांति"
दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सीजफायर को अपनी जीत बताया है. हालांकि, उन्होंने एक बड़ी शर्त जोड़ दी है कि यदि ईरान होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए पूरी तरह और सुरक्षित रूप से नहीं खोलता, तो यह युद्धविराम प्रभावी नहीं रहेगा. ट्रंप ने ईरान के 10-पॉइंट प्लान को "बातचीत का आधार" तो माना है, लेकिन अमेरिकी सैन्य हितों से समझौता न करने की बात भी दोहराई है.
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