
उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर परिक्षेत्र के बफर क्षेत्र में बारिश के दौरान एक अनोखी प्राकृतिक पत्थर संरचना आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। पानी के लंबे समय तक बहाव और कटाव से बनी इस संरचना के बीच से प्राकृतिक जलधारा गुजरती है। स्थानीय लोग इसे ‘कथली’ के नाम से जानते हैं।
बारिश के मौसम में जलधारा का बहाव बढ़ने पर पत्थरों के बीच से पानी गिरता और बहता दिखाई देता है। इससे जंगल के बीच मौजूद यह प्राकृतिक स्थल बेहद खूबसूरत नजर आता है। रविवार को बफर क्षेत्र पहुंचे पर्यटकों ने इस अनोखी संरचना को देखा। इसका वीडियो भी सामने आया है।
धमोखर परिक्षेत्र के जंगल में मौजूद पत्थरीली संरचना के बीच से प्राकृतिक जलधारा गुजरती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इसे ‘कथली’ कहा जाता है। यह जलधारा आगे जाकर उमड़ार नदी में मिलती है।
बारिश के दौरान जलधारा में पानी का बहाव तेज हो जाता है। पानी जब पत्थरों के बीच से गिरता और आगे बढ़ता है, तो यहां का प्राकृतिक दृश्य और आकर्षक हो जाता है।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय के मुताबिक, यह प्राकृतिक पत्थर संरचना हजारों वर्ष पुरानी है। लंबे समय तक पानी के बहाव और कटाव के कारण पत्थरों का यह स्वरूप तैयार हुआ है।
बारिश के मौसम में जलधारा में पानी बढ़ने के कारण यह संरचना खास तौर पर आकर्षक दिखाई देती है। पर्यटक यहां रुककर पत्थरों की प्राकृतिक बनावट और पानी के बहाव को देखते हैं।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में फिलहाल पर्यटन बंद है। ऐसे में पर्यटक बफर जोन में घूमने पहुंच रहे हैं। धमोखर परिक्षेत्र में रविवार को पहुंचे पर्यटकों को यह अनोखी प्राकृतिक संरचना देखने को मिली।
स्थानीय प्राकृतिक स्थलों के प्रति पर्यटकों की रुचि भी इस दौरान बढ़ जाती है। बारिश के कारण जंगल का वातावरण और जलस्रोत दोनों अलग रूप में नजर आते हैं।
‘कथली’ जलधारा और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोत केवल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र नहीं हैं। बारिश के बाद इन जलस्रोतों में जमा पानी गर्मी के मौसम में वन्यजीवों के लिए भी उपयोगी हो सकता है।
प्राकृतिक जलधारा और पत्थरों की संरचना बांधवगढ़ के जंगल की प्राकृतिक विविधता को दर्शाती है। पानी के लगातार बहाव और कटाव से हजारों वर्षों में बनी यह संरचना अब बारिश के मौसम में पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बन रही है।
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